विन्ध्य के सफेद शेरों की धरती मे सच की खवरों के लिए विख्यात दैनिक कीर्ति प्रभा की स्थापना 17 सितम्बर 1998 मे तत्कालीन विधान सभा अध्यक्ष श्री युत श्री निवास तिवारी के मार्ग दर्शन मे उनके निज सचिव रमाशंकर मिश्रा के दवारा की गई। तब से अब तक और आने वाले कल मे हम विन्ध्य के हर चप्पे और गतिविधि पर नजर रखना हमारी जिम्मेदारी मे है।
रविवार, 10 मार्च 2019
गुरुवार, 7 मार्च 2019
डभौरा क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
रीवा। रीवा जिले के तराई अंचल के डभौरा क्षेत्र में पावर प्लांट एवं उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से किसानों से खरीदी गई जमीन के खरीदी के मामले में जहां एक तरफ किसानों को दलालों एवं उद्योग पतियों द्वारा ठगा गया तो वहीं दूसरी तरफ जमीन खरीदने के बावजूद भी उद्योग स्थापित न होने के कारण जिन लोगों की जमीन खरीदी गई उसके बदले में यहां के नौजवानों को एवं किसानों को न तो रोजगार दिया गया और न ही किसी भी प्रकार से लाभ मिल पा रहा है।
सुभाष चौरसिया।
डभौरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत डभौरा घूमन अकौरिया, मगडौर गेदुरहा कोटा के अन्तर्गत किसानों की बेसकीमती जमीन बिचौलियों के माध्यम से औने-पौने दाम दिल्ली नागपुर मुम्बई की अभिजीत गु्रप की एक्सल प्रोवीन लि.कं. नागपुर एवं रिलायंस क्लब दिल्ली विडियोकॉन प्रोसेसर एनर्जी प्रा.लि. कं. मुम्बई जो क्रमश: 14 सौ एकड़ 8 सौ एकड़ एवं 4 सौ एकड़ जमीन यह कहकर कंपनी ने खरीदी की कि इस क्षेत्र में बड़े कंपनी लगाए जायेगे जिससे किसानो एवं युवकों को नौकरी दी जाएगी एवं स्थानीय युवकों को बोरोजगारी के साथ साथ क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों का कहना हेै कि लोगों को यह विश्वास दिलाया गया है कि उद्योग लगने के साथ साथ क्षत्रीय लोगों को अच्छी शिक्षा स्वास्थ सुविधा पेय जल सुविधा एवं आवागमन के लिए सड़क सुविधा भी दी जायेगी। लेकिन इस क्षेत्र के किसानों एवं क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के साथ जो छल किय ागया है उससे इस क्षेत्र का किसान एवं बेरोजगार अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है।
क्षेत्र के किसानों की मांग है कि यूपी एमपी की सीमा पर सौकड़ों एकड़ जमीन की खरीदी की गई तथा उद्योगपति इस क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए रोजगार देने का वादा किया। क्षेत्र के लोगों ने जमीन खरीदी के साथ साथ विकास एवं बेरोजगारों को रोजगार की काफी आशा दिखाई देने लगी थी। इस क्षेत्र में उद्योग लगाने से जहां एक तरफ खुशहाल होगा तो क्षेत्र के नौजवान मुम्बई इंदौर हावड़ा दिल्ली एवं गुजरात के शहरों की ओर पलायन नहीं करना पडेगा।
मालूम हो कि डभौरा अंचल में 6 वर्ष पूर्व उद्योग पतियों द्वारा जमीन खरीदी गई थी परंतु कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उद्योग नहीं लगाया जा रहा है ग्रमीण के किसानों एवं नौजवानों ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक शिकायती पत्र के माध्यम से अविलंब उद्योग लगाए जाने की मांग की है।
लोकेश्वरनाथ में अखण्ड मानस शुरू भण्डारा आज
हर वर्षों की भांति इस वर्ष भी रीवा जिले के तराई अंचल में जन-जन की आस्था से जुड़े लूक गांव से लगे लोकेश्श्वरनाथ भगवान भोले शिवशंकर के धर्म स्थल पर अखण्ड मानस का पाठ जारी है इस महायज्ञ में इसके पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी पहुंचकर भगवान शिव की पूजा अर्चना मुनिराजन के तपोभूमि पर किया करते थे इस दिन भगवान शंकर के इस पवित्र भूमि पर जवा एवं त्योंथर तहसील के अलावा यहां से लगे हुए सीमाई उत्तरप्रदेश के गांव के लोग भी माहाशिवरात्रि के पर्व पर पहुंचते हैं और भगवान भोले की कृपा पाकर जीवन के रथ को आगे बढ़ाते हैं।
कीर्तिप्रभा, रीवा।
मालूम हो कि लोकेश्वरनाथ मंदिर में जवा क्षेत्र के प्रतिष्ठित और जन-जन के चहेते समाजसेवी रमाशंकर मिश्र ने जब से सामाजिक कार्यों में रूचि लेकर जनता के बीच पहुंचे हैं तब से इस स्थान को पुर्न जीवित करने का अभियान चला रहे हैं समाजसेवी रमाशंकर मिश्र के प्रयास से हर वर्ष जहां एक तरफ अखण्ड मानस और भव्य भण्डारे का आयोजन किया जाता है तो वहीं दूसरी तरफ इस स्थान को धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया। परंतु राजनीतिक गलत फेमियों के कारण मुनिराजन में बनाए गए। सुंदर सुंदर भवन को ढहां दिया गया। जिसकी वजह से धार्मिक स्थल को गहरा आघात लगा है पर समाज सेवी रमाशंकर मिश्र भारी झंझावाद के बावजूद भी भगवान भोलेनाथ के इस स्थल को आगे बढ़ाने में डटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि तराई अंचल की इस पवित्र धरा में ऐसा माना जाता है कि मुनिराजन से लगे लोकेश्वरनाथ मंदिर में महर्षि बालमीक की खुटिया में लौ और कुश का जन्म हुआ था जहां पर माता सीता लौकुश के साथ अपने संकट के दिन बिताए थे। इस धार्मिक स्थल की तरह तरह से लोग कथाये कहतें है पर स्थान के प्रशासनिक नजरों से ओझल होने के कारण भव्यता से दूर है। जिसे पूर्ण रूप देने के लिए समाजसेवी रमाशंकर मिश्र का अथक प्रयास अभी भी जारी है। उनक मानना है कि कर्म से ही सफलता संभव है जो मेहनत करके कामयाबी तक पहुंचने का जजबा रखते हैं।
उल्लेखनी है कि जवा तहसील में लूक स्थित लोकेश्वरनाथ भगवान के साथ-साथ थोडी दूर पह ही ग्राम गोहटा देउर में हजार लिंग भगवान सिंह की विशालकाय ऐतिहासिक प्रतिमा है जो टमसा नदी के किनारे विशाल मंदिर में स्थापित है ऐतिहासिक मूर्ति होने के कारण मंदिर का जिर्णोधार किया जाना चाहिए परंतु प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा की वजह से मंदिर की हालत चिंतनीय है जिसकी अलावा भी तराई अंचल में दुअरानाथ जतरी की माता के अलावा नर्सिंगदास जी का आश्रम को जो शासन स्तर पर सुविधाएं मिलनी चाहिए नहीं मिल पा रही लिहाजा धार्मिक स्थलों के प्रति सरकार का रवैया उदासीन होने के कारण लोगों भावनाये हताहत हो रही है और श्रद्धालू को जो लाभ मिलना चाहिए नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के समाजसेवी रमाशंकर मिश्र सहित जनपद पंचायत जवा के अध्यक्ष कमलेश्वर पटेल, जनपद सदस्य रामनरेश तिवारी, सुभाषचंद चौरसिया, प्रदीप सिंह बब्बू, कमलेश पाण्डेय, रमाकांत द्विवेदी, बालेन्द्र मिश्रा, अरूणेन्द्र शेखर मिश्रा, कमलेश मिश्रा, सीताराम मिश्रा, छोटेलाल कोल, ज्वाला प्रसाद पाण्डेय, विजय गुप्ता अमरनाथ पटेल, आदि ने शासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए भगवान लोकेश्वरनाथ मंदिर को भव्य रूप देने की मांग की है।
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जगह-जगह रही महाशिवरात्रि पर्व की धूम
श्रद्धालुओं ने की भगवान शिव की पूजा और मेलों में हुई जमकर खरीदी
जवा ब्लाक के लूक स्थित लोकेश्वरनाथ के शिवालय में हजारों हजार उमड़े श्रद्धालु
वरिष्ठ समाजसेवी रमाशंकर ने आयोजित किया भण्डारा
महाशिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर रीवा शहर सहीत ग्रामीण क्षेत्रों में भगवान शिवशंकर के मंदिरों में रूद्राभिषेक हवन एवं भण्डारे का कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं ग्रामीणों ने जगह-जगह पर लगे धर्म स्थलों पर मेले में खरीदी कर आनंद भी उठाया। जिले के तराई अंचल के जवा ब्लाक में स्थित लूक में लोकेश्वरनाथ में हजारों-हजार की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे जहां पर भगवान शिवशंकर के मंदिर में पूजा अर्चना की और वरिष्ठ समाजसेवी रमाशंकर मिश्र द्वारा आयोजित विशाल भण्डारा कार्यक्रम में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। महाशिवालय लोकेश्वरनाथ में इस वर्ष भी समाजसेवियों ने वहां पर पहुंचने वाले श्रद्धालु को असुविधा न हो पाए तथा भव्य रूप देने के लिए लूक गांव से वरिष्ठ समाजसेवी मुकेश गौतम, टीएन तिवारी, कुंजीलाल मिश्रा, सुधाकर द्विवेदी, सुरेश मिश्रा, केपी मिश्रा, ददन मिश्रा, बृजेश गौतम, मुन्ना देवलिहा आदि का सराहनीय योगदान रहा।
कीर्तिप्रभा, रीवा। पुराणों में यह माना जाता है कि भगवान शिव कई रूपों में अपने श्रद्धालुओं के बीच प्रकट हुए हैं और समय समय पर जन कल्याण के लिए विभिन्न रूपों के माध्यम से अपने भक्तों का उद्धार किया है। भगवान शंकर का अर्धनारीश्वर स्वरूप का पैराणिक उद्भव पुराणों में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप का वर्णन आया है। कथाओं के अनुसार एकबार जब ब्रह्मा जी इस सृष्टि का सृजन करने की सोचते हैं तक सब कीट पतंग जीव जंतु बना देते हैं लेकिन सृस्टि का विकास न होते हुए देख चिंतित होकर भगवान विष्णु के पास जाते हैं। भगवान विष्णु ब्रह्माजी को शिव के पास जाने का आदेश देते हैं। तब भगवान शिव जी द्वारा ब्रह्मा जी को अपना अर्धनारीश्वर स्वरूप दिखाया जाता है और शिव के अर्धनारीश्वर के स्वरूप से देवी का प्रादुर्भाव होता है और कालांतर में वही शिव का अर्धनारीश्वर शरीर शैल पुत्री पार्वती के रूप में जन्मती हैं। अर्धनारीश्वर स्वरूप का रहस्य भगवान शिव के अर्धनारीश्वर शरीर मे भगवान शिव एवं उनकी अर्धांगनी शक्ति का स्वरूप दिखाया गया है। शिव-शक्ति के इस स्वरूप में आध्यात्मिक गहराई है जिसे समझना आवश्यक है। आचार्य ने बताया कि इस सृष्टि के सृजन के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। बिना शक्ति के शिव इस श्रिष्टि का सृजन नही करते। नर और मादा, स्त्री और पुरुष, सृजन के साथ संहार का प्रतीक है भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप। आचार्य ने बताया कि शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप का चिंतन करने से मानवीय शक्तियों में वृद्धि होती है, व्यक्ति सामर्थ्यवान बनकर सांसारिक मोह माया के बंधन में होते हुए भी अंतत: मोक्ष की प्राप्ति करता है। भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप साकार और निराकार ब्रह्म की संपूर्णता को दर्शाता है। सदाशिव भगवान भोलेनाथ सत चित आनंद स्वरूप सच्चिदानंद भगवान हैं, शक्ति के प्रादुर्भाव होने से अर्धनारीश्वर स्वरूप धारण कर वह इस सृष्टि में सृजनात्मक एवं संहारात्मक स्वरूप ग्रहण करते हैं एवं साकार ब्रह्म के रूप में पूजे जाते हैं। महामृत्युंजय मंत्र जप से जीवन मरण से मिलती है मुक्ति, जीव को अमरत्व का होता है बोध आचार्य ने इस बीच कथा के आठवें दिन महामृत्युंजय मंत्र के माहात्म्य पर प्रकाश डाला और बताया कि महामृत्युंजय मंत्र भी महामंत्र है जिसके विधि पूर्वक जप से शास्त्रविहित समस्त कामनाओं की पूर्ति तो होती ही है साथ ही निष्काम भाव से महामृत्युंजय जप और ध्यान से जीवन मरण के चक्र के बंधन से मुक्ति पाकर जीवात्मा को परम पद की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में दुख क्लेश, अधिदैविक, आध्यात्मिक, एवं अधिभौतिक कष्टों के निवारण हेतु सवा लाख महामृत्युंजय जप का विधान बताया गया है। घातक बीमारियों से निजात पाने, जीवन मे शुख शांति के लिए, पूर्वजन्मों के प्राप्त प्रारब्ध कर्मों से उत्पन्न कष्टों के निवारण के लिए एवं आध्यात्मिक एवं मानशिक शक्ति जागृत करने के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र जप का विधान है। महामृत्युंजय मंत्र का सही भावार्थ आचार्य जी ने बताया कि महामृत्युंजय मंत्र का तात्पर्य शारीरिक अमरत्व से कदापि नही है। हाँ महामृत्युंजय मंत्र जप से आयु और शक्ति में अवश्य वृद्धि होती है, जीवन शुखमय, स्वस्थ्य होता है लेकिन जिस किसी भी जीव का जन्म इस मृत्युलोक में हुआ है उसके शरीर का इस आत्मा द्वारा त्याग सुनिश्चित है। अर्थात जो जन्म लेता है उसका मरना सुनिश्चित है अत: महामृत्युंजय मंत्र के जप से कोई शारिरिक अमरता प्राप्त नही कर सकता बल्कि आत्मिक अमरत्व का बोध अवश्य होता है। क्योंकि आत्मा अजर, अमर, शास्वत, सनातन, अजन्मा है इसलिए महामंत्रों के जप एवं इष्ट पर ध्यान से प्रभु उस आत्मा की अमरता का बोध अवश्य कराते हैं जिससे मानव का मृत्युभय समाप्त हो जाता है और जीव जीवन्मुक्त हो जाता है। जिस प्रकार अग्नि को धुआं और सूर्य को बादल ढके रहते हैं उसी प्रकार हमारी अमर आत्मा को अज्ञान रूपी अंधकार ढंका रहता है जिससे उस आत्मा की शक्ति और अमरता का बोध नही होने पाता। यह माया रूपी अज्ञान का आवरण जब आत्मा के ऊपर से हट जाता है उसी क्षण हम अमरत्व को प्राप्त कर लेते हैं और महामंत्र यही आत्मा के अमरत्व का बोध कराकर मॉनव को मुक्तिप्रदान करते हैं। जिस क्षण इस बात का बोध हो जाये कि हम नश्वर शरीर नही बल्कि अमर अजर आत्मा हैं बस उसी क्षण मुक्ति मिल गयी। आत्मा की अमरता का बोध राजा जनक को होना बताया गया इसलिए राजा जनक को विदेह अर्थात जीवन्मुक्त बताया गया।
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डभौरा पंचायत में 38 लाख का गोलमोल
उपयंत्रियों सहित सीईओ की सांठगांठ
जनपद सदस्य रूपांजलि चौरसिया का आरोप है कि डभौरा पंचायत में पंचायत खाते में आने वाली राशि सरपंच के पति, सचिव, उपयंत्री व सहायक यंत्री की मिली भगत से हर साल करोडों रूपये का गोलमाल किया जाता है तथा कार्य न कराने के बावजूद भी सरकारी राशि निकाल कर शासन व जनता के साथ धोखाधडी कर रहे है उनका कहना है कि ग्राम पंचायत डभौरा में बिना निर्माण कार्य पूरा कराये ही तकनीकी उप यंत्रियों ने पूरे कार्यों का मूल्यांकन कर दिया है तथा जो सरकारी खजाने से राशि प्राप्त हो रही है उसे फर्जी तरीके से आहरित की जा रही है। ग्राम पंचायत में प्रतिवर्ष बाजार बैठकी, नल जल, पंचायत के भूखंड स्थापन आदि में लाखों रूपये की का दुरूपयोग किया गया है।
सुभाष चन्द्र चौरसिया
रीवा। जिले में बीते 15 वर्षों के दौरान भारतीय जनता पार्टी क कार्यकाल में भ्रष्टचार धोखाधडी और जनता से जुडी हुई योजनाओं में जिस तरीके से बंदरबांट किया गया और पद का दुरूपयोग कर सरकारी संपत्ति को हडपा गया यह भी रीवा के इतिहास के लिए इतिहास ही बनेगा। शहर से लेकर गांव तक के विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशियों का खुलेआम किया गया, विकास कार्य ठप्प पडे हुए है तो वहीं संबंधित विभाग के अधिकारी व कर्मचारी नगर निगम व ग्रामपंचायत के प्रतिनिधियों से सांठ गांठ कर सरकारी पैसौं से गुलचर्रे उडा रहे है इस अंधेरगर्दी में जन प्रतिनिधियों के शामिल होने के कारणा भ्रष्टचारियों दलालों व गुंडागर्दियों से भय खा रहे है।
इसी कडी से जुडा हुआ जवा जनपद पंचायत के सबसे प्रतिशिष्ट ग्राम पंचायत डभरौ का है जिस ग्राम पंचायत की आवादी सबसे उपर होने के कारण इस ग्राम पंचायत में शासन द्वारा हर साल लाखों करोडो रूपये आवंटन के रूप में प्राप्त होते है पर इस ग्राम पंचायत में विकास कितना हुआ यह तो मौके पर देखने से ही पता चल सकता है इस संबंध में डभौरा क्षेत्र की जनपद वदस्य रूपांजल चौरसिया ने ग्राम पंचायत की दुर्दशा व भ्रष्टाचार को लेकर जनपद पंचायत की सदन की बैठक से लेकर आम सभा ग्राम सभा मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मौखिक चर्चा के अलावा जनपद के अध्यक्ष से बार बार भ्रष्टाचार की जांच कराने की गोहार लगाती रही किन्तु इस भ्रष्टाचार में सभी की लिप्तता होने के कारण किसी के कान में जूं नहीं उठे और सरकारी राशि को हजम करने वाले ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव खुले आम पंचायत के खाते को खाली कर रहे हैँ।
जनपद सदस्य रूपांजलि चौरसिया का आरोप है कि डभौरा पंचायत में पंचायत खाते में आने वाली राशि सरपंच के पति, सचिव, उपयंत्री व सहायक यंत्री की मिली भगत से हर साल करोडों रूपये का गोलमाल किया जाता है तथा कार्य न कराने के बावजूद भी सरकारी राशि निकाल कर शासन व जनता के साथ धोखाधडी कर रहे है उनका कहना है कि ग्राम पंचायत डभौरा में बिना निर्माण कार्य पूरा कराये ही तकनीकी उप यंत्रियों ने पूरे कार्यों का मूल्यांकन कर दिया है तथा जो सरकारी खजाने से राशि प्राप्त हो रही है उसे फर्जी तरीके से आहरित की जा रही है। ग्राम पंचायत में प्रतिवर्ष बाजार बैठकी, नल जल, पंचायत के भूखंड स्थापन आदि में लाखों रूपये की का दुरूपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत सरपंच व सचिव लूट कसोट मनमानी से पंचायत का विकास कार्य ठप्प हो गया है लोगों भीषण गंदगी व पेयजल से झूझना पड रहा हैँ। कलेक्टर से की शिकायत के संबंध जवा मुख्य कार्यपालन अधिकारी का बार बार ध्यान आक्ष्ट कराने के बाद भी कोई कार्यवाही न किये जाने के पीछे भ्रष्टाचार में लिप्तता होना पाया जाता है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि ग्राम पंचायत में हुए भष्टाचार की बिन्दुवार जांच राई जाय तथा सरपंच सचिव द्वारा 31 मार्च 2018 को साधू शरण के गार्ड के घर से पुलिया की ओर सडक निर्माण हेतु 750400 रूपये, 5 फरवरी 18 को नाली और पीसी निर्माण हेतु अमित के घर से केशरी बसोर के कार्य के लिए 5्र55000, 10 अगस्त, 2 अक्टूबर 18 के बीच नाली निर्माण राजा भैया के घर से पुलिया तक ग्राम मझियारी में 5968 रूपये, 2 अक्टॅबर 18 को मझियारी बस्ती रोड से रामनेवाज के घर की ओर पीसीसी रोड के लिए 949500 रूपये, 2 अक्टूबर 18 को मझियारी बस्ती रोड से कु़शवाहा के घर तक पीसीसी रोड निर्माण के लिए 455000 तथा रीवा से आशीष केशरवानी के घर तक पीसीसी रोड निर्माण के लिए 682600 रूपये कुल राशि 3893468 रूपये महज 6 महीने के आस पास आहरित कर सरपंच सचिव बंदरबांट कर गये जिसकी जांच कराये जाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा होगा।
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